प्राकृतिक चिकित्सा से कोरोना व ब्लैक फंग्स या अन्य खतरनाक वायरस को आसानी से भगाया जा सकता हैं।मानव शरीर में किसी भी खतरनाक वायरल से लड़ने के के तमाम ततव मौजूद होते हैं ।खानपान कि गड़बड़ी से उन तत्वों का संरक्षण हो जाता हैं। जिससे उन्हें पनपने का मौका मिल जाता हैं।यह प्राकृतिक चिकित्सा के विशेषज्ञयों का मानना हैं। इनके अनुसार प्राकृतिक चिकित्सा में किसी भी खतरनाक वायरस का पूर्व से उपचार किया जाता हैं।असाध्य रोगों को शरीर से दूर भगाने के लिए सबसे पहले शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत किया जाता हैं।
पशु पक्षियों के बाँडी से फैल रहे वायरस। ----------------------------------------------------
प्राकृतिक चिकित्सकों का मानना हैं कि जंगल कटने की तीव्रता से जंगली जानवर अचानक शहरों में प्रकट होने लगते हैं । इस तरह पशु पक्षियों के माँस खाने से उनके शरीर में मौजूद वायरस मानव शरीर में फैलने लगे हैं। यह मनुष्य में बढतें माँसाहार के कारण हो रहा हैं।सबसे पहले बता दे कि कोरोना व ब्लैक फंग्स नया वायरस नहीं हैं। ऐसे कई खतरनाक वायरस वातावरण में पहले से मौजूद हैं। अफ्रीका के रिसेस मंकी से एचआईवी फैला। वहाँ रिसेस मंकी का शिकार कर उसका माँस खाने लगे । उसके पंजें, नाखून,खाल का इस्तेमाल होने लगा। रिसेस मंकी के हाँस्ट बाडी (आश्रयदायी शरीर)में मौजूद वायरस मनुष्य में फैला। आज नतिजा खतरनाक हैं ।कोरोना या ब्लैक फंग्स नाम भले नया हैं लेकिन ऐसा वायरस पूर्व से भारतीय वातावरण मे भी हैं। डाँ जेता कहते हैं कि नवगछिया के धरहरा गांव में चमगादड़ों की संख्या काफी हैं।एक प्रचीन विशाल पीपल का पेड़ हैं।वर्ष 1990-91 तक लोग चमगादड़ों का माँस खाया करते थे । नतीजा वहां मनुष्य का मृत्यु का दर बढ गया था।चिकित्सकीय सलाह पर वहाँ चमगादड़ खाना छोड़ा तो स्थिति सामान्य हुई। वर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू, ड्राप्सी भी पशु -पक्षियों ,चिकन आदि खाने से फैला ।माँसाहार मानव शरीर के प्रतिरोध क्षमता का क्षरण भी करता हैं।
ऐसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाएँ
प्राकृतिक चिकित्सा में इम्यूनिटी बढाने और खतरनाक रोगों को दूर भगाने के लिए फलाहार जरुरी हैं । फल ,अँकुरित चना,मूँग ,गेहूं, कच्ची सब्जियों के सलाद ,रेशेदार भोजन, काला गुड़ लेने होगे।
शरीर में तेजाब का होना जरूरी
शरीर में तेजाब की मात्रा जरूरी हैं जो प्रतिरोधक क्षमता बढाता हैं। कोरोना या ब्लैक फंग्स या अन्य वायरस को भगाने के लिए तेजाब तो पी नही सकते। ऐसे में तेजाब यानी अम्ल हम खाद्य पदार्थ के जरिए शरीर के अन्दर पहुचाएंगे।इसके लिए खट्टे व तिखे खाद्य पदार्थ आहार मे ं सामिल करेंगे। जैसे इमली,इमली की पत्ती, करी पत्ता, नीबूं, अनानास, संतरा, मौसमी, आंवला, खट्टे दही की कढ़ी, टमाटर, पालक, मूली का इस्तेमाल करें।पेट साफ रहेगा। इंफेक्शन नहीं फैलेगा।सबेरे रोज बिस्तर छोडऩे पर आधा चम्मच मीठा सोडा एक गिलास पानी में मिला कर सेवन करना चाहिए जो खून को खारा बनाता हैं ।
इसे अपनाने से नहीं फटकेगा वायरस
1-नमक पानी का गलगला।
2-नहाने के पूर्व शरीर पर नमक का लेप लगाए,पांच मिनट बाद स्नान करें।
3-गर्म पानी का भाप लेना।
4-गर्म पानी में पैर रखना।
5-गहरे गड्डे से निकली मिट्टी का लेप शरीर पर लगाना।
6-लकड़ी व गोयठे की राख का भी लेप लगाकर शरीर सुखने दे फिर स्नान करें।
इन खाद्य पदार्थो से बनाए दूरी
कब्ज बननेवाले प्रोसेस्ड फूड, मैदा के बने आहार से दूरी बनानी होगी।■
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