1-सभी रोग, उनके कारण और उपचार एक हैं।दर्दनाक और पर्यावरणीय स्थिति को छोड़ कर ,सभी रोगों का कारण एक हैं यानी शरीर में रुग्णता कारक पदार्थ का संचय होना।सभी रोगों का उपचार शरीर से रूग्णता कारक पदार्थ का उनमूलन हैं।
2-रोग का प्राथमिक कारण रुग्णता कारक पदार्थ का संचय हैं ।बैक्टीरिया व वायरस शरीर मे ंप्रवेश कर तबभी जीवित रहते हैं जब रुग्णता कारक पदार्थ का संचय हो और उनके विकास के लिए अनुकूल वातावरण शरीर में स्थापित हुआ हो ।अत:रोग का मूल कारक रुग्णता कारक पदार्थ हैं और बैक्टीरिया द्वितीयक कारण बनते है।
3-गंभीर बीमारियां शरीर द्वारा आत्म चिकित्सा का प्रयास होता हैं। अत:वे हमारे मित्र हैं, शत्रु नहीं । पुराने रोग गम्भीर बिमारियों के गलत उपचार और धमन का परिणाम हैं।
4-प्रकृति सबसे बड़ा मरहम लगाने वाली हैं ।मानव शरीर में स्वयं ही रोगों से खुद को बचाने की शक्ति हैं तथा अस्वस्थ होने पर स्वास्थ्य पुनः प्राप्त कर लेती हैं ।
5-प्राकृतिक चिकित्सा में केवल रोग ही नहीं बल्कि रोगी के पूरे शरीर पर असर होकर वह नीवकृत होता हैं।
6-प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा पुरानी बिमारियों से पीड़ित मरीज को भी अपेक्षाकृत कम समय में सफलता पूर्वक उपचारित किया जाता हैं।
7-प्रकृति के उपचार मे ं दबे हुए रोगों को सतह पर लाया जाता हैंऔर स्थायी रूप से हटा दिया जाता हैं ।
8-प्राकृतिक चिकित्सा एकही समय में सभी तरह के पहलुओं जैसे शारिरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक का उपचार करती हैं ।
9-प्राकृतिक चिकित्सा शरीर का संपूर्ण रुप से उपचार करती हैं।
10-प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार ,केवल भोजन ही चिकित्सा हैं, कोई बाहरी दवाओं का इस्तेमाल नहीं किया जाता हैं।
11-स्वयं के आध्यात्मिक विश्वास के अनुसार प्रार्थना करना उपचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
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