1-सभी रोग एक हैं, और उनका कारण भी एक ही हैं और उनका उपचार भी एक ही हैं:--
प्राकृतिक चिकित्सा में सभी रोग, उनके कारण उनकी चिकित्सा भी एक हैं चोट व वातावरणजन्य परिस्थितियों को छोड़ कर सभी रोगों का मूल्य कारण एकही हैं और उनका उपचार भी एकही हैं, शरीर में विजातीय पदार्थों का संग्रह हो जाना जिससे रोग उत्पन्न होते हैं।उनका निष्कासन ही चिकित्सा हैं।प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार सभी रोग एकही हैं।रोग को अलग-अलग नामों से जाना जाता हैं जिस प्रकार चाँदी से बने आभूषणों के अलग-अलग नाम हैं जैसे -कंगन, पायल,अंगूठीआदि उसी प्रकार एकही विजातीय द्रव्य के अलग-अलग स्थान पर एकत्र होने के कारण रोगों के अनेको नाम हैं।रोग एकमात्र कारण विजातीय द्रव्य हैं।जिसे टाँक्सिक मैटर कहते है,शरीर एक मशीन के समान कार्य करता हैं जिसके कारण हमारे शरीर में विजातीय द्रव्य एकत्रित होते रहते है और उत्सर्जन तंत्र के माध्यम से बाहर निकाल जाते है।जैसे पसीने के रुप में ,मलमूत्र के रुप में और जब यही मल शरीर से सुचारु रुप से नहीं निकलता तो शरीर के विभिन्न स्थानों पर जमा होने लगता हैं, और वही सड़ने लगता हैं जिसके कारण रोग होते हैं।जैसे-आंतों की सफाई न होने पर कब्ज होती हैं जिसके कारण बवासीर व फिसर जैसे रोग होते हैं।अन्त में इनका व्यापक रूप हमारा रक्त भी दूषित कर देता है,जिससे चर्मरोग होता हैं।हृदय पर ज्यादा दबाव पड़ने से हृदय रोग भी हो जाता हैं।श्वसन का कार्य बढ़ जाने से श्वांस संबंधित रोग उत्पन्न होते है।इन सबकी जड़ केवल विजातीय द्रव्य ही होते हैं।इस लिए जब सारे रोग एक हैं और उनका कारण भी एक हैं तो उसका उपचार भी एकही होगा और वह हैं शरीर से विजातीय द्रव्यों का निष्कासन जिससे शरीर शुध्द हो और रोग समाप्त हो सकें ।विजातीय द्रव्य के समाप्त होने से शरीर स्वस्थ व स्फूर्तिवान हो जाता हैं। इसलिए प्राकृतिक चिकित्सा मे शरीर की शुध्दि को महत्वपूर्ण स्थान दिया हैं और विभिन्न माध्यमों से शरीर से विजातीय द्रव्यों को बाहर निकाल कर इसका उपचार किया जाता हैं।इससें स्पष्ट होता हैं कि सभी रोग एक हैं।क्योंकि वे एक ही प्रकार के कारण से उत्पन्न होते हैं, इस लिए उनका उपचार भी एकमात्र हैं--शरीर से विजातीय द्रव्यों को बाहर निकालना ।
शेष भाग अगले दिन--------
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें