शुक्रवार, 4 जून 2021

प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांत

 अगले अंक का शेष --------

5- चिकित्सा रोग की नहीं संपूर्ण शरीर की होती है -- प्राकृतिक चिकित्सा में चिकित्सा रोग की नहीं बल्कि रोगी की होती है!अन्य चिकित्सा पद्धतियों में केवल रोग निवारण पर बल दिया जाता है,परंतु प्राकृतिक चिकित्सा केवल रोग का ही नहीं अपितु संपूर्ण शरीर की चिकित्सा करती है! जिससे रोग स्वत : मिट जाता हैं! क्योंकि रोग का मूल कारण तो शरीर में एकत्र बिष है, जैसे सिर दर्द होने पर अधिकांश लोग दवाओं का प्रयोग करते हैं!जिससे कुछ समय के लिए दर्द समाप्त हो जाता है! लेकिन बार-बार होता रहता है,क्योंकि उसकी जड़ तो कहीं और होती है प्राकृतिक चिकित्सा में पेट तथा आंतों को साफ करके सिरदर्द को पूर्ण रूप से समाप्त किया जाता है!

       चिकित्सा और शरीर की सफाई से सारे रोग एक के बाद एक करके समाप्त हो जाते हैं, इसलिए केवल रोग की चिकित्सा न कर के संपूर्ण शरीर की चिकित्सा की जाती है!

6-- प्राकृतिक चिकित्सा में निदान की विशेष आवश्यकता नहीं है -- प्राकृतिक चिकित्सा के सिद्धांत के अनुसार सभी रोग एक ही है,और उनके कारण भी एक ही है ऐसी अवस्था में रोग निदान की विशेष आवश्यकता नहीं रह जाती है! वर्तमान समय में रोग के निदान के लिए बड़ी-बड़ी मशीनें व उपकरण प्रयोग में लाए जाते हैं जिसके माध्यम से शरीर में रोग का पता लगाया जाता है, जिस के विपरीत प्रभाव रोगी पर देखने को मिलते हैं एक्सरे मशीन से आंखों की रोशनी प्रभावित होती है, गर्भाशय शिशु पर विपरीत प्रभाव पड़ता है!यहां तक कि बच्चा अपंग पैदा हो  सकता है इस प्रकार की मशीनों के अत्यधिक प्रयोग से रोग निवारण नहीं बल्कि रोग को बढ़ाया जा रहा है जिससे शरीर और दूषित होता है!, इसके अतिरिक्त रोगी पर अत्यधिक आर्थिक दबाव पड़ता है,जिससे वह मानसिक रूप से छुब्द हो जाता है! लेकिन प्राकृतिक चिकित्सा में किसी भी उपकरण की सहायता के बिना आकृति निदान की व्यवस्था है,रोगी की आकृति को देखकर सिर्फ या पता लगाना है, कि शरीर के किस भाग पर विजातीय द्रव्य की अधिकता है चेहरे को देखकर गर्दन को देखकर और पेट को देखकर ही रोग का निदान किया जाता है जो एक बहुत ही सरल और सहज प्रक्रिया है, रोगी को किसी प्रकार की परेशानी नहीं होती और आर्थिक दबाव बिल्कुल नहीं होता है!

7- जिरण् रोगी के आरोग्य में समय लग सकता है -- जीरन रोगी का अर्थ है जिससे रोग लंबे समय से बैठा है उसे समाप्त करने में समय लगता है जिरंड रोग न तो बहुत जल्दी आते हैं और ना ही पलक झपकते ठीक हो सकते हैं जिरंड रोग उस पेड़ के समान होते हैं जो कई वर्षों से अपनी जड़ें जमाए हुए हैं इसलिए उसकी जड़ें जमीन में बहुत अंतर तक चली जाती है पेड़ को पत्ते तने से बहुत जल्दी काटा जा सकता है!इसी प्रकार जीरण्ड रोग शरीर में बहुत जगह बना लेते हैं और उन्हें जड़ से मिटाने में थोड़ा समय लगता है

 वर्तमान समय की चिकित्सा पद्धति रोग के लक्षणों को मिटती है जो कुछ समय के लिए होते हैं! और बार बार उभर कर सामने आते रहते हैं क्योंकि जल्दी आराम पाने के चक्कर में औषधियों के माध्यम से रोग रूपी पेड़ के तने को काटते हैं जिसके कुछ समय बाद फिर अंकुर आकर बड़े पेड़ बन जाते हैं! लेकिन प्राकृतिक चिकित्सा रोग को जड़ से मिटाने का प्रयास करती है और साथ ही जीवनी शक्ति का विकास करती है,जो कि औषधियों के सेवन से नस्ट होती है

 यह मनुष्य का दुर्भाग्य है कि वह प्रकृति से दूर होता जा रहा है! और कृत्रिम दुनिया में जी रहा है! आज की औषधियां इसी का उदाहरण है जिसें खा जिसे  खाकर मनुष्य सोचता है किवह स्वास्थ्य को प्राप्त कर रहा है परंतु सत्य है कि वह खुशी से जहर खा रहा है जो धीरे-धीरे उसे अंदर से खाए जा रहा है जिसका पता उसे कुछ समय बीत जाने के बाद लगता है जब वह एक रोग को दूर करने के लिए ली गई औषधियों के कारण दूसरे रोग को आमंत्रित कर देता है!

 प्राकृतिक चिकित्सा में जिंरंड रोगी के स्वास्थ्य लाभ के लिऐ समय लगने का एक महत्वपूर्ण कारण यह भी है कि व्यक्ति हर जगह से थक हार कर उसकी ओर मुड़ता है और फिर अपने साथ जगह-जगह से एकत्र किया हुआ औषधि  से रोग लेकर आता है जो प्राकृतिक चिकित्सा के कार्य की और भी बढ़ा देता है रोज इससे रोगी के आरोग्य लाभ में समय लग सकता है इसलिए रोगी को पूर्ण धैर्य पूर्वक प्राकृतिक चिकित्सा करानी चाहिए जिससे पूर्ण लाभ मिल सके!

    शेष अगले अंक में--------

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