शनिवार, 29 मई 2021

प्राकृतिक चिकित्सा के सिध्दांत

अगले अंक का शेष------------
    4-प्राकृतिक स्वयं चिकित्सक हैं -----प्राकृति स्वयं सबसे बड़ी चिकित्सक हैं। शरीर में स्वयं रोगों से बचने व अस्वस्थ हो जाने पर पुनः स्वस्थ प्राप्त करने की क्षमता विद्यमान हैं।प्रकृति जीव का संचालन करती हैं जो प्रत्येक जीवन के पार्श्व में रहकर उसके जन्म ,मरण ,स्वास्थ्य एवं रोग आदि का ध्यान रखती हैं ,उस महान शक्ति को जीवनी शक्ति, प्राण आदि कहते हैं।शरीर की समस्त क्रियाएं इसी के माध्यम से संपन्न होतीं हैं। हमारा खाना पीना, बोलना, चलना, उठना, बैठना सब इसी पर निर्भर हैं। माँ अपने बच्चों के लिए सब बातों का जैसे ध्यान रखती हैं, वैसे ही प्राकृति हमारा ख्याल रखती हैं और जब तक बच्चा माँ के पास रहता हैं ,वह अपने आप को सुरक्षित महसूस करता हैं ।जिस प्रकार खाना खिलाते समय यदि खाना अटक जाये तो माँ बच्चे के पीठ पर जोर से मारती हैं, पानी पिलाती हैं।ठीक इसी प्रकार से प्राकृति भी हर तरह से ध्यान रखती हैं।जब खाना गलती से श्वास नली में चला जाता हैं तो प्राकृति स्वयं ही तुरंत खाँसी उत्पन्न कर उसे बाहर निकल देती हैं। 
    इसी प्रकार जबब कोई भी जहरीली चीज मुँह में चली जाती हैं तो तुरंत उल्टी होने लगती हैं और जहर बाहर निकाल जाता हैं। घाव हो जाने पर उसे कौन भरता हैं?हड्डी टूट जाने पर उसे कौन जोड़ता हैं?चिकित्सक केवल सहारा देता हैं, लेकिन हड्डी को जोड़ नहीं सकता ।यह कार्य केवल और केवल प्रकृति रुप में माँ ही कर सकती हैं।संसार में प्रकृति से बड़ा चिकित्सक कोई नहीं हैं, प्रकृति ही सभी साध्य व असाध्य रोगों का उपचार करती हैं।प्राकृतिक चिकित्सा तो प्रकृति के कार्य में सहायक के रुप में कार्य करता. हैं।

   इस अंक का शेष भाग अगले दिन --------

मंगलवार, 25 मई 2021

प्राकृतिक चिकित्सा के सिध्दांत

शेष अगले अंक का -----------
3-रोग का कारण कीटाणु नहीं--रोग के मुख्य कारण कीटाणु नहीं हैं।जीवाणु शरीर में जीवन शक्ति के ह्रास होने के कारण एवं विजातीय पदार्थों के संग्रह के पश्चात तब आक्रमण कर पाते है,जब शरीर में उनके रहने और पनपने लायक अनुकूल वातावरण तैयार हो जाता हैं, अतः मूल कारण विजातीय पदार्थ हैं।उपर्युक्त सिध्दांत से स्पष्ट हो जाता हैं कि रोग का एक मात्र कारण विजातीय द्रव्य हैं तो कीटाणु रोग का कारण कैसे हो सकते हैं।स्वास्थ्य शरीर में कीटाणुओं का अस्तित्व नहीं होता हैं लेकिन इसके विपरीत रोगियों में विभिन्न प्रकार के कीटाणु प्रवेश करते रहते हैं और रोगी को जरजर करते रहते हैं।ऐसा क्यों होता हैं, यह एक प्राकृतिक नियम हैं कि सृष्टि में जितने पदार्थ हैं इनके सूक्ष्म परमाणु अनवरत रूप से गतिशील रहते हैं।जिन वस्तुओं के परमाणु एक सी गति रखते हैं, उनमें परस्पर आकर्षण होते हैं और विरुध गति के परमाणु एक-दूसरे से भागते हैं ।अतः इस सिध्दांत के अनुसार कीटाणुओं का अस्तित्व उन्हीं शरीर में होता हैं जिनमें पहले से ही विजातीय द्रव्य विद्यमान हो अथवा जो रोग ग्रस्त हैं या जीवनी शक्ति कमजोर हो क्योंकि विजातीय द्रव्य के कारण जीवन शक्ति का ह्रास होता हैं, उस अवस्था में कीटाणुओं का प्रवेश शरीर में होता हैं।
   जिस प्रकार गुड के पास ही मक्खियां आती हैं।ठीक उसी प्रकार ही गंदगी में मच्छर आते हैं, क्योंकि की कीटाणुओं को जीवित रहने के लिए उनका आहार चाहिए जो कि स्वास्थ्य व्यक्ति में उन्हें नहीं मिलता और वे जीवित नहीं रह पाते।इसके विपरीत रोगी के शरीर में उनका चौगुना विकास होता हैं।यही कारण हैं कि किसी भी प्रकार के कीटाणुओं के संक्रमण में 100℅लोग प्रभावित नहीं होते, वह लोग उसकि चपेट में आते हैं जिनका रहन-सहन सही नहीं हैं।जिनकी जीवन शक्ति प्रबल होती हैं ,उनमें कीटाणु जीवित नहीं रह पाते इस लिए वह स्वस्थ्य रहते हैं ।इससें स्पष्ट है कि रोग के प्रभाव का प्रथम कारण एकमात्र विजातीय द्रव्य ही होते हैं कीटाणु नहीं।
   शेष अंक अगले दिन-------

सोमवार, 24 मई 2021

डीएम व एसपी ने किया गेहूं क्रय केन्द्र का निरीक्षण

 
 **दिए आवश्यक निर्देश* 
 *छोटे किसानों को गेहूं क्रय में दे वरीयता** 

 देवरिया (सू0वि0)24 मई।
जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन के निरीक्षण में नमन सेवा कृषि उपज समवर्धन सह०स०लि० सोनाडी मोड, ब्लाक भलुअनी गेहूं क्रय केन्द्र कीसमीक्षा की गई।  समीक्षा में पाया गया कि इस केन्द्र पर 1508.325 मी0टन 211 कृषकों से गेहूँ क्रय की गयी है एवं क्रीत गेहूँ के सापेक्ष 730.00 मी0टन गेहूँ भा०खा०नि० के डिपों में सम्प्रदान किया गया है। निरीक्षण के समय केन्द्र पर  अजय सिंह केन्द्र पर अपना 250 कु० गेहूँ विक्रय करने हेतु उपस्थित थे। केन्द्र प्रभारी द्वारा अवगत कराया गया कि बड़े किसानों का खरीद हेतु दबाव है। जिलाधिकारी द्वारा केन्द्र प्रभारी को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि 15 जून तक खरीद में छोटे किसानों को वरीयता दे. क्योंकि छोटे किसानों को शासन स्तर से वरीयता देने के निर्देश है।क्रय विक्रय सह०स० लि० करूअना ब्लाक भलुअनी केन्द्र का निरीक्षण के समय केन्द्र प्रभारी शसुरेश प्रसाद उपस्थित मिलें जिलाधिकारी महोदय द्वारा खरीद की समीक्षा में पाया गया कि उक्त केन्द्र पर 699.174 मी0टन 92 कृषकों से गेहूँ क्रय की गयी है एवं क्रीत गेहूँ के सापेक्ष 530.00 मी0टन गेहूँ भा०खा०नि० के डिपों में सम्प्रदान किया गया है।    
     जिलाधिकारी द्वारा पिछले वर्ष एवं इस वर्ष की खरीद की तुलनात्मक समीक्षा की गयी एवं क्रय केन्द्र प्रभारी को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि छोटे किसानों को खरीद में प्रत्येक स्तर वरीयता दें। विपणन शाखा बरहज क्रय केन्द्र का निरीक्षण किया गया, निरीक्षण में पाया गया कि केन्द्र प्रभारी श्री दिलीप कुमार, वि०नि० केन्द्र पर उपस्थित मिलें। समीक्षा में पाया गया कि उक्त केन्द्र पर 162.70 मी0टन की गयी है। निरीक्षण के समय पाया गया कि केन्द्र पर कृषक की खरीद हो रही है। जिलाधिकारी महोदय द्वारा केन्द्र प्रभारी से खरीद कम होने का कारण पूछा गया एवं स्पष्ट निर्देश दिये गये है एवं यह भी निर्देश दिये गये है कि लगातार प्रतिदिन खरीद होनी चाहिए। केन्द्र पर आये हुए कृषक से खरीद सम्बन्धी व्यवस्था के सम्बन्ध में पूछ-ताछ की गयी एवं समस्या का निराकरण भी कराया गया।
      जिलाधिकारी द्वारा उपस्थित अधिकारियों को भी निर्देशित किया गया कि जिन क्रय केन्द्रों पर गोदाम भर गया है तो आस-पास कहीं अन्य स्थान पर गेहूँ क्रय प्रारम्भ करायें जिससे किसानों का खरीद बाधित न हो एवं इस सम्बन्ध में यदि आवश्यक हो तो अन्य विभाग के अधिकारियों से भी समन्वय स्थापित करें। गेहूँ क्रय प्रत्येक दशा में सुचारू रूप से होना चाहिए। निरीक्षण के समय पुलिस अधीक्षक, अपरजिलाधिकारी (वि० / रा०) / जिला खरीद अधिकारी, उपजिलाधिकारी बरहज, जिला खाद्य विपणन अधिकारी एवं सहायक आयुक्त एव सहायक निबन्धक सहकारिता, देवरिया उपस्थित थे।
 

प्राकृतिक चिकित्सा के सिध्दांत

 अगले अंक शेष ------
   2--तीव्र रोग शत्रु नहीं मित्र होते हैं---तीव्र रोग चूंकि शरीर एक उपचारात्मक एक प्रयास हैं, अतः ये हमारे शत्रु नहीं हैं।जीर्ण रोग तीव्र रोग दबाने से और गलत उपचार से पैदा होता हैं।प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार रोगों को दो श्रेणी में बांटा गया हैं --1-तीव्र रोग,2-जीर्ण रोग।जीर्ण रोग वे होते हैं जो शरीर में दबे रहते हैं और लम्बे समय के बाद प्रकट होते हैं।जिनके शरीर में रहते हुए हमारा शरीर काम तो करता हैं लेकिन अन्दर से क्षतिग्रस्त होते रहता हैं और लम्बे समय तक शरीर में बने रहते है क्योंकि इनकी जड़ें शरीर में जम चूंकि होती हैं।इसके विपरित  तीव्र रोग वह होते हैं जिनकी अवस्था में शरीर कार्य करने मे ं सक्षम नहीं हो पाता हैं और यह शरीर में तीव्र गति से आते हैं और वैसे ही तीव्र गति से चले जाते हैं।प्राकृतिक चिकित्सा में तीव्र रोगों को मित्र कहा गया हैं जिस प्रकार सामने से वार करने वाले से खतरनाक छिप कर वार करने वाला होता हैं।उसी प्रकार तीव्र रोग समाने से वार करता हैं इससे व्यक्ति को संभालने का अवसर मिल जाता हैं।
  तीव्र रोग के कारण शरीर से विजातीय द्रव्यों का निसकासन भी हो जाता हैं जैसे--उल्टीई,दस्त होने से पेट और आंतों की सफाई हो जाती हैं।जुकाम व बुखार में यही विजातीय द्रव्य पसीने के रुप मे बाहर निकलते है और जीवन शक्ति का पुनः विकास होने लगता हैं।तीव्र रोग हमरे शरीर के अन्दर के विष को बाहर निकालने का काम करता हैं, किन्तु हम घबरा कर औषधियों के माध्यम से उनके कार्य मेन रुकावट डाल देते हैं जिससे तीव्र रोग कुछ समय बाद जीर्ण रोग का रुप धारण कर लैतेहैं। उदाहरण के लिए समान्य सर्दी जुकाम जो मौसम बदलने के कारण हमारे शरीर की प्रतिक्रिया होती हैं जिसके कारण मल बाहर निकलना चाहता हैं लेकिन हम औषधियोंको खाकर हम इसे रोक देते हैं और कुछ समय बाद यही अस्थमा, बोकाईटिस,सायनस जैसे जीर्ण बिमारीयों के रूप में सामने आते हैं।तीव्र रोग हमरे भूल का स्मरण कराते हैं।गलत आहार के कारण उल्टी और दस्त ठण्डी चीजों के अधिक सेवन के कारण सर्दी जुकाम आदि उसके कारण हैं।इसलिए ही इन्हें मित्र कहाँ गया हैं क्योंकि सच्चा मित्र ही हमें हमारी भूलो की पहचान करा सकता हैं।जिससे वह भूल दोहरायी न जा सके ।
   शेष अगले दिन ------    

रविवार, 23 मई 2021

तीन चीज खाली पेट लेने से बढ़तीं हैं प्रतिरोधक क्षमता(Immunity Booster)

Immunity Booster: खाली पेट इन 3 चीजों के सेवन से तेजी से बढ़ेगी रोग प्रतिरोधक क्

Immunity Boosterवर्तमान समय में Immunity Booster करने के महत्व के बारे में कोई अनभिज्ञता नहीं है। इस महामारी के समय में हर कोई चाहता है कि उसकी Immunity Booster हो ताकि वह इस जानलेवा वायरस की चपेट में न आए।

विशेषज्ञों का मानना ​​है कि खाली पेट कुछ चीजें खाने से सेहत पर अच्छा असर पड़ता है। यह Immunity Booster में भी मदद करता है। आइए जानते हैं ऐसे 3 खाद्य पदार्थों के बारे में जिन्हें खाली पेट खाने से लोगों के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती हैं।

लहसुन: स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार लहसुन में एंटी-बायोटिक और एंटी-बैक्टीरियल गुण होते हैं जो प्राकृतिक रूप से संक्रमण के खतरे को कम करने में मदद करते हैं। इतना ही नहीं इसके सेवन से शुगर लेवल कंट्रोल में रहता है, हृदय स्वस्थ रहता है।

और फेफड़ों से जुड़ी कोई समस्या नहीं होती है। लहसुन में कई पोषक तत्व होते हैं, जो गले के संक्रमण और बैक्टीरिया से लड़ने में कारगर होते हैं। साथ ही जो लोग खांसी की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं, उन्हें एक गिलास अनार के रस में लहसुन के रस की कुछ बूंदों को,

मिलाकर नियमित रूप से इस रस का सेवन करना चाहिए, इसलिए सुबह लहसुन खाने से कई बीमारियों का खतरा होता है। से कम है। एक से दो कली लहसुन को सुबह गर्म पानी के साथ खाना चाहिए।

आंवला: विटामिन सी वाला आंवला सबसे अच्छा इम्युनिटी बूस्टर कहा जाता है। आप इसे गर्म पानी में कद्दूकस करके डाल सकते हैं और फिर सुबह खाली पेट इसका सेवन कर सकते हैं। साथ ही, आंवले में भरपूर मात्रा में एंटी-ऑक्सीडेंट होते हैं जो स्वस्थ त्वचा और चमकदार बालों पर खाली पेट खाने पर पाए जा सकते हैं।

शहद: स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना ​​है कि सुबह खाली पेट एक गिलास गर्म पानी में एक चम्मच शहद मिलाकर पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। आप चाहें तो स्वाद के लिए नींबू भी मिला सकते हैं। इससे न केवल स्वाद बढ़ेगा बल्कि पेय पौष्टिक भी बनेगा।

इस ड्रिंक में भरपूर मात्रा में Antioxidant होते हैं जो शरीर को फ्री रेडिकल्स से लड़ने में सक्षम बनाते हैं। साथ ही यह एंटी-बैक्टीरियल गुणों से भी भरपूर होता है जो Immunity Booster में मददगार होता है।

प्राकृतिक चिकित्सा के सिध्दांत

कल का शेष भाग---------------------
1-सभी रोग एक हैं, और उनका कारण भी एक ही हैं और उनका उपचार भी एक ही हैं:--
       प्राकृतिक चिकित्सा में सभी रोग, उनके कारण उनकी चिकित्सा भी एक  हैं चोट व वातावरणजन्य परिस्थितियों को छोड़ कर सभी रोगों का मूल्य कारण एकही हैं और उनका उपचार भी एकही हैं, शरीर में विजातीय पदार्थों का संग्रह हो जाना जिससे रोग उत्पन्न होते हैं।उनका निष्कासन ही चिकित्सा हैं।प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार सभी रोग एकही हैं।रोग को अलग-अलग नामों से जाना जाता हैं जिस प्रकार चाँदी से बने आभूषणों के अलग-अलग नाम हैं जैसे -कंगन, पायल,अंगूठीआदि उसी प्रकार एकही विजातीय द्रव्य के अलग-अलग स्थान पर एकत्र होने के कारण रोगों के अनेको नाम हैं।रोग एकमात्र कारण विजातीय द्रव्य हैं।जिसे टाँक्सिक मैटर कहते है,शरीर एक मशीन के समान कार्य करता हैं जिसके कारण हमारे शरीर में विजातीय द्रव्य एकत्रित होते रहते है और उत्सर्जन तंत्र के माध्यम से बाहर निकाल जाते है।जैसे पसीने के रुप में ,मलमूत्र के रुप में और जब यही मल शरीर से सुचारु रुप से नहीं निकलता तो शरीर के विभिन्न स्थानों पर जमा होने लगता हैं, और वही सड़ने लगता हैं जिसके कारण रोग होते हैं।जैसे-आंतों की सफाई न होने पर कब्ज होती हैं जिसके कारण बवासीर व फिसर जैसे रोग होते हैं।अन्त में इनका व्यापक रूप हमारा रक्त भी दूषित कर देता है,जिससे चर्मरोग होता हैं।हृदय पर ज्यादा दबाव पड़ने से हृदय रोग भी हो जाता हैं।श्वसन का कार्य बढ़ जाने से श्वांस संबंधित रोग उत्पन्न होते है।इन सबकी जड़ केवल विजातीय द्रव्य ही होते हैं।इस लिए जब सारे रोग एक हैं और उनका कारण भी एक हैं तो उसका उपचार भी एकही होगा और वह हैं शरीर से विजातीय द्रव्यों का निष्कासन जिससे शरीर शुध्द हो और रोग समाप्त हो सकें ।विजातीय द्रव्य के समाप्त होने से शरीर स्वस्थ व स्फूर्तिवान हो जाता हैं। इसलिए प्राकृतिक चिकित्सा मे शरीर की शुध्दि को महत्वपूर्ण स्थान दिया हैं और विभिन्न माध्यमों से शरीर से विजातीय द्रव्यों को बाहर निकाल कर इसका उपचार किया जाता हैं।इससें स्पष्ट होता हैं कि सभी रोग एक हैं।क्योंकि वे एक ही प्रकार के कारण से उत्पन्न होते हैं, इस लिए उनका उपचार भी एकमात्र हैं--शरीर से विजातीय द्रव्यों को बाहर निकालना ।

     शेष भाग अगले दिन--------

शनिवार, 22 मई 2021

प्राकृतिक चिकित्सा के सिध्दांत

मनुष्य प्रकृति का एक हिस्सा हैं ।उसका शरीर इन्हीं प्रकृति तत्व से बना हैं।प्राकृतिक चिकित्सा के सिध्दांत नितान्त मौलिक हैं ,इनके अनुसार प्राकृति के नियमों के उल्लंघन करने से रोग पैदा होते हैं तथा प्रकृतिक नियमों का पालन करते हुए पुनः निरोग हो सकते हैं ।मनुष्य शरीर में स्वभाविक रुप से एक ऐसी प्रकृति प्रदत्त पायी जाती हैं जो सदैव भीतरी व बाहरी हानिकारक प्रभावों से मानव की रक्षा करती हैं।जिसको नियमियता कहाँ जाता हैं और साधारण लोग जिसे जीवनी -शक्ति  के नाम से पुकारते है,वहीं शक्ति सब प्रकार के रोगों के कारणों को स्वयमेव दूर करती हैं ।वह निरन्तर शरीर का पुनः निर्माण करती रहती हैंऔर जो टूट- फूट हो जाती हैं उसकी मरम्मत का भी ध्यान रखती हैं, साथ ही शरीर के भीतर अस्वभाविक तत्व पैदा हो जाते है या बाहर से पहुंच जाते हैं उन्हें निकालने का भी शरीर प्रयत्न करती रमती हैं।रोग मनुष्य के लिए अस्वभाविक अवस्था हैं जब वह प्राकृतिक नियम का उल्लंघन या विरुद्ध मार्ग पर चलने लगता हैं तो उसके शरीर में विजातीय द्रव्य की मात्रा बढऩे लगता हैं जिसके परिणाम स्वरूप शरीर में तरह-तरह के बिष उत्पन्न होने लगते है ओर वातावरण में पायेजाने वाले हानिकारक कीटाणुओं कीटाणुओं का भी उसपर आक्रमण होने लगता हैं, इससे शरीर का पोषण व सफाई करने वाले यंत्र निर्बल पड़ने लगते हैं ।उनके कार्यों में त्रुटि होने लगती हैं, और मनुष्य रोगी हो जाता हैं ।शरीर के भीतर रोग निरोधक शक्ति पर भारी पड़ती हैं जिसके द्वारा शरीर में उत्पन्न हुए अथवा बाहर से प्रवेश पाकर बाहर से पहुंचे हुए रोग कीटाणुओं का विनाश निरन्तर होता रहता हैं। उदाहरण---यदि आँख में कोई बिष कीटाणु जा पहुंचे तो निरन्तर आँसू निकलता हैं ।इन आँसुओं में लाइसोजीम नामक पदार्थ रहता हैं जिसकी निरोध शक्ति अद् भुत हैं।

  प्राकृतिक चिकित्सा की मान्यता हैं कि रोग एक हैं और उसका इलाज भी एक हैं अतः कोई भी असाध्य से असाध्य रोग हो इस चिकित्सा से उसका उचित समय से निराकरण किया जा सकता हैं।रोगी को ठीक हो जाने पर पुनः उसको रोगी होने की सम्भावना क्षीण हो जाती हैं।प्राकृतिक चिकित्सा से रोग जड़ से दूर होते हैं।स्वास्थ्य के संबंधित नियमों का पालन तथा किसी भी काम में अति न करना प्राकृतिक चिकित्सा का मुख्य सिध्दांत हैं।प्रकृति के नियमों को तोड़ने से बीमारियां पैदा होती हैं ।जबकि प्रकृति के नियमों के पालन करने से हमारे स्वास्थ्य की रक्षा होती हैं ।प्रकृति के नियमों के पालन के लिये आवश्यक होता हैं कि हमें प्राकृतिक चिकित्सा के महत्वपूर्ण सिध्दंतो  के बारे में जानकारी हो जो हैं --प्राकृतिक चिकित्सा के मूलभूत सिध्दांत हैं।"जीवन शैली"मनुष्य रोगी न बने इसके लिए प्राकृतिक चिकित्सा के दस आधार भूत  सिध्दांत निम्न हैं---------    शेष अगले दिन  ।

Mucormycosis: हवा और मिट्टी में रहता है Black Fungus, डॉक्टर्स ने जारी की गाइडलाइन

Mucormycosis: हवा और मिट्टी में रहता है Black Fungus, डॉक्टर्स ने जारी की गाइडलाइन

Mucormycosisदेश के कई राज्यों में Mucormycosis (Black Fungus) एक नई त्रासदी बनकर उभरा है। हर दिन इसके नए मामले चिंता पैदा करते हैं। ऐसे में हम थोड़ी सावधानी बरतकर इस Black Fungus से खुद को बचा सकते हैं।

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इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की ओर से जारी एडवाइजरी आपके बहुत काम आ सकती है। आइए जानते हैं कि Black Fungus (Mucormycosis) क्या है, इसके क्या लक्षण हैं और इससे कैसे बच सकते है।

Mucormycosis होता हैं हवा में

Mucormycosis एक फंगल संक्रमण है। यह उन लोगों को प्रभावित करता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता किसी बीमारी या उसके उपचार के कारण कमजोर हो जाती है। यह कवक हवा में मौजूद होता है और ऐसे लोगों में पहुँचकर उनको संक्रमित करता है।

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लक्षणों को पहचानें

  • आंखों और नाक के आसपास दर्द या लाली
  • बुखार
  • सरदर्द
  • खांसी
  • सांस लेने में परेशानी
  • उल्टी में खून
  • मानसिक भ्रम की स्थिति

यह भी पढ़ें: कोरोना से ठीक होने के बाद भी हो सकती है ये समस्‍या, ये चीजें Lungs को रखेगी स्‍वस्‍थ

इनको खतरा ज्यादा

  • जिन्हें अनियंत्रित मधुमेह है
  • स्टेरॉयड लेने वाला
  • लंबे समय से ICU में हैं
  • किसी प्रकार का प्रत्यारोपण
  • वोरिकोनाजोल थेरेपी ली हो (एंटीफंगल उपचार)

हम कैसे रक्षा कर सकते हैं

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  • Mucormycosis: हवा और मिट्टी में रहता है Black Fungus, डॉक्टर्स ने जारी की गाइडलाइन

    Mucormycosisदेश के कई राज्यों में Mucormycosis (Black Fungus) एक नई त्रासदी बनकर उभरा है। हर दिन इसके नए मामले चिंता पैदा करते हैं। ऐसे में हम थोड़ी सावधानी बरतकर इस Black Fungus से खुद को बचा सकते हैं।

    इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च की ओर से जारी एडवाइजरी आपके बहुत काम आ सकती है। आइए जानते हैं कि Black Fungus (Mucormycosis) क्या है, इसके क्या लक्षण हैं और इससे कैसे बच सकते है।

    Mucormycosis होता हैं हवा में

    Mucormycosis एक फंगल संक्रमण है। यह उन लोगों को प्रभावित करता है जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता किसी बीमारी या उसके उपचार के कारण कमजोर हो जाती है। यह कवक हवा में मौजूद होता है और ऐसे लोगों में पहुँचकर उनको संक्रमित करता है।

    लक्षणों को पहचानें
    • आंखों और नाक के आसपास दर्द या लाली
    • बुखार
    • सरदर्द
    • खांसी
    • सांस लेने में परेशानी
    • उल्टी में खून
    • मानसिक भ्रम की स्थिति

    यह भी पढ़ें: कोरोना से ठीक होने के बाद भी हो सकती है ये समस्‍या, ये चीजें Lungs को रखेगी स्‍वस्‍थ

    इनको खतरा ज्यादा

    • जिन्हें अनियंत्रित मधुमेह है
    • स्टेरॉयड लेने वाला
    • लंबे समय से ICU में हैं
    • किसी प्रकार का प्रत्यारोपण
    • वोरिकोनाजोल थेरेपी ली हो (एंटीफंगल उपचार)

    हम कैसे रक्षा कर सकते हैं

    अगर आप धूल भरे कंस्ट्रक्शन साइट पर जाते हैं तो मास्क जरूर पहनें।
    • बागवानी या मिट्टी का काम करते समय जूते, फुल पैंट-शर्ट और दस्ताने पहनें।
    • व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखें। प्रतिदिन अच्छा स्नान करें।

    इन बातों को न करें नज़र-अंदाज़
    (अगर कोरोना, डायबिटीज और इम्यूनोसप्रेसेंट का इलाज चल रहा है)

    • नाक जाम हो जाता है या नाक से काला या खूनी पदार्थ निकलता है।
    • गाल की हड्डी में दर्द होता है। नाक/तालु पर कालापन आ जाए।
    • दांतों में दर्द हो, दांतों में ढीलापन लगे, जबड़े में समस्या हो
    • त्वचा के घाव, बुखार, दर्द या धुंधला दिखे, खून का थक्का जमें।
    • सीने में दर्द होता है, सांस लेने में तकलीफ होती है।

    इन बातों का रखें ध्यान

    • रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करें।
    • डायबिटीज के मरीज कोविड इलाज के बाद ब्लड ग्लूकोज पर नजर रखे।
    • डॉक्टर की सलाह पर ही स्टेरॉयड लें। इनका इस्तेमाल सही समय, सही खुराक और सही समय तक ही करें।
    • ऑक्सीजन थेरेपी के लिए स्वच्छ औ स्टेराइल पानी का ही प्रयोग करें।
    • एंटीबायोटिक और एंटीबायोटिक्स दवाओं का प्रयोग सावधानी से करें।

    यह भी पढ़ें: 1 डोज़ Covishield Vaccine और दूसरी लगी Covaxin तो ये होगा असर, बता रहे हैं विशेषज्ञ

    ये गलतियां न करें
    • Black Fungus के लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
    • यदि आपके पास नाक बंद है, तो इसे साइनेसाइटिस के रूप में न मानें, खासकर यदि आप उच्च जोखिम वाली श्रेणी में हैं।
    • डॉक्टर की सलाह पर KOH स्टेनिंग और माइक्रोस्कोपी, कल्चर, MALDI-TOF की जांच करवाएं।
    • इलाज में देरी न करें, पहला लक्षण दिखते ही सतर्क हो जाएं।

    स्थिति को कैसे संभालें (डॉक्टर की देखरेख में)

    • मधुमेह और मधुमेह कीटोएसिडोसिस को नियंत्रित करें।
    • यदि रोगी स्टेरॉयड ले रहा है, तो उन्हें बंद करने के लिए उन्हें धीरे-धीरे कम करें।
    • इम्यूनोमॉड्यूलेटिंग दवाओं को बंद करें।
    • पहले से ऐंटिफंगल दवाएं न लें।
  • बागवानी या मिट्टी का काम करते समय जूते, फुल पैंट-शर्ट और दस्ताने पहनें।
  • व्यक्तिगत स्वच्छता का ध्यान रखें। प्रतिदिन अच्छा स्नान करें।

इन बातों को न करें नज़र-अंदाज़
(अगर कोरोना, डायबिटीज और इम्यूनोसप्रेसेंट का इलाज चल रहा है)

  • नाक जाम हो जाता है या नाक से काला या खूनी पदार्थ निकलता है।
  • गाल की हड्डी में दर्द होता है। नाक/तालु पर कालापन आ जाए।
  • दांतों में दर्द हो, दांतों में ढीलापन लगे, जबड़े में समस्या हो
  • त्वचा के घाव, बुखार, दर्द या धुंधला दिखे, खून का थक्का जमें।
  • सीने में दर्द होता है, सांस लेने में तकलीफ होती है।

इन बातों का रखें ध्यान

  • रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करें।
  • डायबिटीज के मरीज कोविड इलाज के बाद ब्लड ग्लूकोज पर नजर रखे।
  • डॉक्टर की सलाह पर ही स्टेरॉयड लें। इनका इस्तेमाल सही समय, सही खुराक और सही समय तक ही करें।
  • ऑक्सीजन थेरेपी के लिए स्वच्छ औ स्टेराइल पानी का ही प्रयोग करें।
  • एंटीबायोटिक और एंटीबायोटिक्स दवाओं का प्रयोग सावधानी से करें।

यह भी पढ़ें: 1 डोज़ Covishield Vaccine और दूसरी लगी Covaxin तो ये होगा असर, बता रहे हैं विशेषज्ञ

ये गलतियां न करें
  • Black Fungus के लक्षणों को नजरअंदाज न करें।
  • यदि आपके पास नाक बंद है, तो इसे साइनेसाइटिस के रूप में न मानें, खासकर यदि आप उच्च जोखिम वाली श्रेणी में हैं।
  • डॉक्टर की सलाह पर KOH स्टेनिंग और माइक्रोस्कोपी, कल्चर, MALDI-TOF की जांच करवाएं।
  • इलाज में देरी न करें, पहला लक्षण दिखते ही सतर्क हो जाएं।

स्थिति को कैसे संभालें (डॉक्टर की देखरेख में)

  • मधुमेह और मधुमेह कीटोएसिडोसिस को नियंत्रित करें।
  • यदि रोगी स्टेरॉयड ले रहा है, तो उन्हें बंद करने के लिए उन्हें धीरे-धीरे कम करें।
  • इम्यूनोमॉड्यूलेटिंग दवाओं को बंद करें।
  • पहले से ऐंटिफंगल दवाएं न लें।
  • रेडियो-इमेजिंग के साथ निगरानी करें।

नोट: (यह जानकारी स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग, स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय भारत सरकार की तरफ से जारी की गई है।)

शुक्रवार, 21 मई 2021

विनाशकारी कोरोना का हाई बीपी के मरीजों पर बढ सकता हैं खतरा

  

कोरोना की दूसरी लहर ने पूरे देश में कोहराम मचा रखा है, पिछले दिनों इस विनाशकारी महामारी से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं, जबकि हजारों लोग अपनी जान गंवा चुके हैं। हालांकि अब दूसरी लहर के धीरे-धीरे कम होने की उम्मीद है और संक्रमण के मामले पहले कम आ रहे हैं।

लेकिन मरने वालों की संख्या में कोई खास कमी नहीं आई है। और वैज्ञानिक अभी भी तीसरी लहर का अनुमान लगा रहे हैं। ऐसे में हर दूसरा शख्स सदमे में है. कॉमरेडिटी वाले मरीजों में कोरोना वायरस से संक्रमित होने और वायरस का भयावह रूप लेने का अधिक खतरा होता है।

ऐसे में विशेषज्ञों की ओर से High BP के मरीजों के लिए चिंता जाहिर की जा रही है.आपको बता दें कि खान-पान और जीवनशैली में बदलाव हाइपरटेंशन का सबसे बड़ा कारण है। विशेषज्ञों द्वारा किए गए कई शोधों में पाया गया कि High BP के रोगियों को इस विनाशकारी कोरोना महामारी का अधिक खतरा होता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, कोरोना वायरस के बाद जान गंवाने वाले मरीजों में हाइपरटेंशन के मरीजों की संख्या भी ज्यादा पाई गई है. ऐसे में हाइपरटेंशन और डायबिटीज के मरीजों को कोरोना के प्रति और ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है. इस लेख में हम आपको बताएंगे कि कोरोना वायरस और High BP में क्या संबंध है।

High BP के रोगियों में, वायरस विकराल क्यों हो जाता है, जानेें

इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (द इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च) के मुताबिक, कोरोना से संक्रमित 80 फीसदी लोगों में हल्के या हल्के लक्षण होते हैं और वे जल्द ही पूरी तरह से ठीक हो जाते हैं। लेकिन High BP या अन्य हृदय रोग से पीड़ित लोगों में यह वायरस विकराल रूप धारण कर लेता है।

गुरुवार, 20 मई 2021

अब 250रुपये की कोविसेल्फ कीट से खुद कर सकेंगे कोरोना की जांच, जाने इस्तेमाल का तरीका



नई दिल्ली. इंडियन का काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने घर पर कोरोना वायरस टेस्टिंग (Coronavirus Testing) के लिए कोविसेल्फ नामक किट को मंजूरी दे दी है. इस फैसले के बाद अब लोग महज 250 रुपये खर्च कर घर पर रैपिड एंटीजन टेस्ट किट (RAT) लाकर कोविड टेस्ट कर सकते हैं. खास बात है कि इससे महज 15 मिनटों में जांच के नतीजे सामने आ जाएंगे. हालांकि, ICMR ने जांच के लिए भी एडवाइजरी जारी की है, जिसमें फिजूल जांच नहीं करने की सलाह दी गई है.

ICMR ने कहा है कि पुणे स्थित मायलैब डिस्कवरी सॉल्युशन लिमिटेड की तरफ से रैपिड एंटीजन टेस्ट किट तैयार की गई है. संस्था ने कहा है कि इसका इस्तेमाल वे ही लोग करें, जिन्हें कोविड-19 के लक्षण नजर आ रहे हैं या वे किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं. ICMR की तरफ से जारी बयान में कहा गया है, 'इसमें अंधाधुंध टेस्टिंग की सलाह नहीं दी जाती है. सभी लोग जिनकी जांच पॉजिटिव आई है, उन्हें वास्तविक पॉजिटिव माना जा सकता है और बार-बार टेस्टिंग की कोई जरूरत नहीं है.'

कैसे करना है इस्तेमाल

यूजर मैनुअल के अनुसार, 'नेजल स्वाब को दोनों नॉस्ट्रिल्स में 2 से 4 सेमी तक डालें. इसके बाद स्वाब को दोनों नॉस्ट्रिल्स में 5 बार तक घुमाएं. स्वाब को पहले से भरे हुए ट्यूब में डालें और बचे हुए स्वाब को तोड़ दें. ट्यूब का ढक्कन बंद करें. बाद में टेस्ट कार्ड पर ट्यूब दबाक एक के बाद एक दो बूंदें डालें और नतीजों के लिए 15 मिनट का इंतजार करें. कोई भी नतीजा जो 20 मिनट के बाद आए, उसे अवैध समझा जाए.'

टेस्ट कार्ड पर दो सेक्शन होंगे. जिनमें से एक कंट्रोल सेक्शन और एक टेस्ट सेक्शन होगा. अगर बार केवल कंट्रोल सेक्शन 'C' पर नजर आए, तो नतीजा नेगेटिव है. अगर बार कंट्रोल सेक्शन और टेस्ट सेक्शन (T) दोनों पर आए, तो इसका मतलब है कि एंटीजन का पता चल गया है और टेस्ट पॉजिटिव है.

निर्माता कंपनी ने क्या कहा

 रिपोर्ट के अनुसार, मायलैब डिस्कवरी सॉल्युशन के एमडी हसमुख रवाल ने कहा, 'टेस्ट किट बाजार में एक हफ्ते में उपलब्ध हो जाएगी. इस प्रोडक्ट को तैयार करने में हमें 5 महीने का समय लगा. हमने इसकी कीमत 250 रुपये प्रति किट रखी है, जिसमें टैक्स भी शामिल है.' उन्होंने बताया, 'किट को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि यह इस्तेमाल करने में बेहद आसान है और बायोहजार्ड नहीं है. इसके साथ ही एक सेफ्टी बैग भी आता है, जिसमें आप इस्तेमाल के बाद किट को डालकर डिस्पोज कर सकते हैं.'

उन्होंने कहा, 'पॉजिटिव जांच में 5 से 7 मिनट का समय लगेगा और नेगेटिव रिजल्ट में ज्यादा से ज्यादा 15 मिनट का वक्त लगेगा.' रिपोर्ट के अनुसार, टेस्ट किट के इस पाउच में एक पहले से भरा हुआ एक्स्ट्रेक्शन ट्यूब, नैजल स्वाब, एक टेस्ट कार्ड और सेफ्टी बैग साथ आएगा. इसके अलावा टेस्ट करने वाले व्यक्ति को अपने फोन में मायलैब कोविसेल्फ ऐप डाउनलोड करनी होगी.

ICMR के बयान के मुताबिक, 'पॉजिटिव आए सभी लोगों को होम आइसोलेशन और ICMR और स्वास्थ्य मंत्रालय के नियमों के हिसाब से ख्याल रखने की सलाह दी जाती है.' हाल ही में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ICMR के प्रमुख डॉक्टर बलराम भार्गव ने कहा था कि परिषद घर पर कोविड-19 जांच किए जाने की व्यवस्थाओं को तलाश रही है.

बुधवार, 19 मई 2021

एकीकृत कोविड कमाण्ड सेन्टर के टेलीफोन नम्बर 05568-222505 पर कोविड से जुडी किसी भी समस्या व जानकारी के लिये करें सम्पर्क



 *त्वरित किया जायेगा उसका समाधान* 

 देवरिया (सू0वि0) 19 मई। जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन ने बताया है कि कलक्ट्रेेट सभागार में एकीकृत कोविड कमाण्ड सेन्टर स्थापित किया गया है, जिसमें चक्रवार अधिकारियों एवं कर्मचारियों की तैनाती की गयी है, जो कोविड से जुडी हर समस्या को पंजीकृत करते हुए उसका संज्ञान लेते है एवं त्वरित समाधान उन सभी समस्याओं का कराया जाता है। कन्ट्रोल रुम में टेलीफोन नम्बर 05568-222505 स्थापित है, इसके साथ ही 9 हंटिंग नम्बर इससे जुडे हुए है।
       जिलाधिकारी ने आम जन से अपेक्षा करते हुए कहा कि कोविड से जुडी किसी भी तरह की कोई समस्या जैसे जांच, लैब, एम्बुलेन्स, चिकित्सकीय परामर्श, क्षेत्रों में सैनिटाईजेशन, अस्पतालो में बेड की उपलब्धता आदि से जुडी किसी भी जानकारी एवं समस्या के लिये कन्ट्रोल रुम के टेलीफोन नम्बर 05568222505 पर सम्पर्क करें।  
           

डीएम व एसपी ने दल-बल के साथ नगर में भ्रमण कर जिला कन्टेनमेण्ट जोन एवं कोरोना कफ्र्यू का लिया जायजा।



 *नगरीय क्षेत्र के स्वास्थ्य केन्द्रों का भी किया निरीक्षण, दिये आवश्यक निर्देश* 

 *कोरोना कफ्र्यू का सभी करें अनुपालन* 

 *अनावश्यक घरों से न निकलें बाहर-डीएम* 
                                                                   देवरिया  19 मई। जिलाधिकारी आशुतोष निरंजन पुलिस अधीक्षक डा श्रीपति मिश्र आज पूरे दल-बल के साथ नगर के कन्टेनमेण्ट जोन एवं कोरोना कफ्र्यू के पालन का वास्तविकता जानने के लिये निकले। इस दौरान वे पूरे नगरीय क्षेत्रों में भ्रमण किये। कोरोना कफ्र्यू पालन किये जाने हेतु लोगो को जागरुक किये। परशुराम चौक के निकट कन्टेनमेण्ट जोन के व्यवस्थाओं का जायजा लिया। तैनात कर्मियों को कोविड प्राविधानो का पालन कराये जाने का निर्देश दिया।
       जिलाधिकारी श्री निरंजन पुलिस अधीक्षक के साथ एसडीएम सदर, क्षेत्राधिकारी के पूरे काफिले के साथ कोरोना कफ्र्यू का जायजा लिये। इस दौरान लोगो को जागरुक किये जाने के साथ ही जिलाधिकारी ने जनमानस से अपील करते हुए कहा कि कोरोना कफ्र्यू के दिशा निर्देशों का पालन करें और  इसके लिये जिला प्रशासन का सहयोग भी करें। उन्होने कहा कि यह व्यवस्था इस महामारी के रोकथाम के लिये की गयी है। आप सभी इसका अवश्य ही पालन करें। अनावश्यक घरों से न निकलें। मास्क का प्रयोग करें। कन्टेनमेण्ट जोन में जो भी प्राविधान तय किये गये है, उसका अक्षरशः पालन करें।
        पुलिस अधीक्षक डा श्रीपति मिश्र ने इस दौरान पुलिस विभाग के अधिकारियों एवं कर्मियों को कोरोना कफ्र्यू का कडाई से पालन कराये जाने के निर्देश देते हुए कहा कि इसके लिये सत्त व पैनी रखी जाये। घोषित कन्टेनमेण्ट जोन में भी अपनी कडी निगरानी रखें। इसके उपरान्त जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक नगरीय क्षेत्र के स्वास्थ्य केन्द्र रामनाथ देवरिया पहुॅचें और वहां वैक्सीनेशन आदि कार्यो का जायजा लिया। इस दौरान उन्होने प्रभारी चिकित्साधिकारी डा विनीत युवराज को वैक्सीनेशन आदि कार्यो को सुचारु रुप से कराये जाने का निर्देश दिया। जिलाधिकारी ने इस केन्द्र पर किये गये वैक्सीनेशन कार्य पर सन्तोष जताया।
       इस निरीक्षण के दौरान एसडीएम सदर सौरभ सिंह, क्षेत्राधिकारी श्रीयश त्रिपाठी, अधिशासी अधिकारी नगरपालिका रोहित सिंह आदि सम्मिलित रहे।  
 

बंद कमरे में मिली पिता पुत्र की लास मची सनसनी



वाराणसी। सारनाथ थानाक्षेत्र के अंतर्गत श्रीनगर कालोनी में स्थित एक कच्चे मकान में दो लाशें मिलने से सनसनी फ़ैल गयी। शव होने की सूचना स्थानीय लोगों ने पुलिस को दी थी। मौके पर पहुंची पुलिस ने सड़ चुकी लाशों को कब्ज़े में लेकर मॉर्चरी में रखवा दिया है। घटना की सूचना पर सहायक पुलिस आयुक्त कैंट अभिमन्यु मांगलिक भी मौके पर पहुंचे।


सहायक पुलिस आयुक्त कैंट अभिमन्यु मांगलिक ने बताया कि आज सुबह श्रीनगर कालोनी सारनाथ निवासी अंकित मौर्या ने 112 नंबर पर कॉल करके सूचना दी थी कि उनके मकान के पास स्थित एक घर से बदबू आ रही है, शायद अंदर कोई शव है। इस सूचना पर पुलिस आयी तो घर के अंदर एक कमरे के बेड पर दो लाशें सड़ी हुई मिली हैं। लाश 7 से 8 दिन पुरानी लग रही है। 


सहायक पुलिस आयुक्त ने बताया कि आस-पास जानकारी करने पर पता चला है कि मृतक जितन ओझा बिहार के भोजपुर जनपद के रहने वाले हैं और यहां रहकर पुत्र के साथ मज़दूरी का कार्य करते थे और कुछ दिन से बीमार चल रहे थे। प्रथम दृष्टया बिमारी से मौत होना प्रतीत हो रहा है। फिलहाल परिजनों को सूचना भेजवाई जा रही है। परिजनों के आने के बाद शवों का पोस्टमार्टम करवाया जायेगा, जिसके बाद मौत की वजह स्पष्ट हो पाएगी


हैरान कर देने वाली खबर यूपी से



कोरोना से सिर्फ 3 टीचरों की मौत हुई –सरकार

सरकार का दावा सिर्फ 3 टीचरों की मौत

ड्यूटी पर कोरोना से सिर्फ 3 टीचर मरे-सरकार

बेसिक शिक्षा विभाग ने प्रेस नोट जारी किया है

शिक्षक कर्मचारी संघों का दावा 1671 मौतें हुई।

करीब 800 शिक्षकों की कोरोना से मौत-शिक्षक संघ

पंचायत चुनाव ड्यूटी में 800 से ज्यादा शिक्षक मरे

लेकिन सरकार ने सिर्फ 3 मौतें स्वीकार की है

टीचरों,कर्मचारियों की कोरोना से मौत सरकार ने नहीं मानी।

आज की बड़ी खबर

*ग्रामीण इंडियन न्यूज पर सुबह की बड़ी  खबरें*


*(1) देश मे 24 घंटे में कोरोना के 267334 नये केस।*
*मौत--4529(RECORD)*
*ठीक-389851*
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*(1)तूफान:-पीएम मोदी आज करेंगे तूफान प्रभावित इलाकों का दौरा,भावनगर, दीव और सौराष्ट्र का करेंगे दौरा।*


*(2)तबाही:-ताऊते तूफान से 3 दिन में 27 लोंगो की मौत हुई।*
*16500 कच्चे मकानों के हुआ नुकसान।*
*40000 से अधिक पेड़ उखड़े।*


*(3)दिल्ली:-सीएम केजरीवाल ने महामारी में मदद का एलान किया,कोरोना से होने वाली जिम्मेदार नागरिक की मौत पर उसके परिजनों को 50000rs मुआवजा तथा 2500rs मासिक पेंशन दी जाएगी।*


*(4)हाइकोर्ट की तल्ख टिप्पणी:-मेरठ जैसे शहर में डॉक्टरों पर बुजुर्ग के शव की शिनाख्त न होने पर हालात भगवान भरोसे बताये,5 शहरों के मेडिकल कॉलेजों को हाईटेक बनाने के दिये आदेश।*


*(5)ब्लैक फंगस:-हरियाणा में ब्लैक फंगस ने पाँव पसारे, अब तक 115 मामले सामने आये।*
*यूपी के KGMU में अब तक 34 मरीज।*


*(5)पहल:-रिलायन्स की नई पहल,यूपी में आवश्यक सेवाओं जैसे एम्बुलेंस या अन्य किसी वाहन को मुफ्त डीजल या पेट्रोल देगी,30 जून तक हर दिन 50 लीटर तेल मुफ्त।*


*(6)राजस्थान:-झालावाड़ में बेवजह घूमने वाले लोंगो की पुलिस वालों ने आरती उतारकर शर्मिंदा किया,कुछ जगह लोंगो से कसरत भी करायी।*


*(7)दुःखद:-यूपी सरकार के मंत्री विजय कश्यप का कोरोना से निधन।*
*मेरठ में 2 सगे भाइयों का कोरोना से निधन।*


*(8)यूपी के हापुड़ में नदी में शव मिलने से सिसायत शुरू हुई,पुलिस अलर्ट,ड्रोन के जरिए रखी जा रही है नजर।*


*(9)अलीगढ़:-तस्करों का तांडव, शराब तस्करों को पकड़ने गयी पुलिस पर ग्रामीणों ने किया हमला,पुलिसकर्मियों की पिटाई का वीडियो वायरल।*


*(10)खास खबर-----*
*कानपुर:-स्कूटी सवार युवती को सरेआम गोली मारी।*
*कानपुर:-दरोगा को लॉकडाउन का पालन कराना पड़ा मँहगा,आइस क्रीम विक्रेता ने रॉड से किया हमला।*
*प्रतापगढ़:-युवती को एम्बुलेंस में बिठाकर भगाने का प्रयास।*
*उन्नाव:-जमीनी विवाद में जमकर मारपीट,दर्जनों घायल।*
*नोयडा:-महिला डॉक्टर की गोली मारकर हत्या।*
*ओडिशा में 19 मई से 1 जून तक लॉकडाउन बड़ा।*
*मथुरा:-सांसद हेमामालिनी के लापता होने के लगे पोस्टर।*
*यूपी में छोटी हुई शादियों की गेस्ट लिस्ट,25 लोंगो की अनुमति।*





*STAY HOME SAFE HOME*
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मंगलवार, 18 मई 2021

पुलिस उपमहानिरीक्षक गोरखपुर परिक्षेत्र, गोरखपुर व स्टाफ ऑफिसर, जोनल कार्यालय की जांच आख्या के बाद गौरी बाजार थाना प्रभारी गिरिजेश तिवारी लाइन हाजिर

पुलिस उपमहानिरीक्षक गोरखपुर परिक्षेत्र, गोरखपुर व स्टाफ ऑफिसर, जोनल कार्यालय की जांच आख्या के बाद गौरी बाजार थाना प्रभारी गिरिजेश तिवारी लाइन हाजिर 


देवरिया।गौरीबाजार के थाना प्रभारी गिरिजेश तिवारी हुए लाइन हाजिर। लापरवाही पर पुलिस अधीक्षक ने की कार्यवाही।

बताया जा रहा है कि आवेदिका रिंकी राव पत्नी रणधीर प्रताप राव निवासी बखरा थाना गौरी बाजार जिला देवरिया एवं आवेदक श्री राम प्रकाश सिंह निवासी महादेव झारखंडी गोरखपुर द्वारा अपर पुलिस महानिदेशक गोरखपुर जोन के समक्ष उपस्थित होकर  गिरिजेश तिवारी प्रभारी निरीक्षक गौरी बाजार के विरुद्ध गाड़ी ओवरटेक करने को लेकर हुए विवाद में उनके परिजनों को फर्जी मुकदमें में फंसाने तथा द्वेष पूर्ण तरीके से गैंगस्टर एक्ट का मुकदमा लिख दिये जाने का गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायती प्रार्थना-पत्र प्रस्तुत किया गया था।प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए एडीजी  द्वारा प्रकरण की जांच संयुक्त रुप से पुलिस उपमहानिरीक्षक गोरखपुर परिक्षेत्र, गोरखपुर व स्टाफ ऑफिसर, जोनल कार्यालय, गोरखपुर से कराई गई । इनके द्वारा उपलब्ध कराई गई जांच आख्या के आधार पर कार्यवाही करते अकर्मण्यता और शिकायतकर्ता के परिजनों के विरुद्ध द्वेषपूर्ण कार्यवाही के संबंध में प्रभारी निरीक्षक गौरी बाजार गिरिजेश तिवारी को तत्काल लाइन हाजिर करते हुए नियमानुसार परिनिंदा प्रविष्टि एवं सत्य निष्ठा के संबंध में 24 घंटे में नोटिस निर्गत कर अनुशासनात्मक कार्रवाई कर अवगत कराने हेतु पुलिस अधीक्षक देवरिया को एडीजी  द्वारा निर्देशित किया गया है ,साथ ही निष्पक्ष रुप से अग्रिम विवेचनात्मक कार्यवाही हेतु गाड़ी ओवरटेक करने को लेकर हुए विवाद में थाना गौरी बाजार में पंजीकृत मुकदमें को जनपद देवरिया से अपराध शाखा गोरखपुर को स्थानांतरित किया है । इसी मुकदमें के आरोपी के विरुद्ध थाना गौरी बाजार में पंजीकृत गैंगस्टर के मुकदमें की निष्पक्ष रुप से विवेचना कराते हुए नियमानुसार अंतिम रिपोर्ट के संबंध में कार्यवाही 7 दिवस के अंदर सुनिश्चित कराने हेतु भी एडीजी महोदय द्वारा पुलिस अधीक्षक देवरिया को निर्देशित किया गया था।

भिवंडी में 12 हजार जिलेटिन की छड़ बरामद, क्राइम ब्रांच पुलिस की कार्यवाही

भिवंडी में 12 हजार जिलेटिन की छड़े बरामद। क्राइम ब्रांच पुलिस की कार्रव

भिवंडी।। प्रसिद्ध उद्योग पति मुकेश अंबानी के घर के पास मिली स्कॉर्पियो कार में जिलेटिन की छड़े बरामद होने के बाद पुलिस ने जिलेटिन की छड़े को इकठ्ठा करने वालों पर कार्रवाई करना शुरू किया है. इसी क्रम में सोमवार 1:30 बजे के दरमियान क्राइम ब्रांच पुलिस के युनिट क्रमांक एक ने भिवंडी के कारिवली ग्राम पंचायत स्थित एक कार्यालय में छापा मारकर 12 हजार जिलेटिन की छड़ो के साथ अन्य विस्फोट सामग्री बरामद किया है.इतनी भारी मात्रा में विस्फोट सामग्री मिलने से पूरे क्षेत्र में सनसनी फैली हुई है.वही पर क्राइम ब्रांच की पुलिस ने खदान मालिक को गिरफ्तार कर लिया है.जिसे न्यायालय में 22 मई तक पुलिस रिमांड में भेज दिया है। 

घर के एसी -कूलर में भी लगते है ब्लैक फंग्स

सावधान...




 *कमजोर इम्‍यूनिटी वालों को बना सकता है शिकार*

*गोरखपुर;* कोरोना संक्रमितों को अब ब्‍लैक फंगस डरा रहा है। आमतौर पर यह माना जा रहा है कि यह फंगस अस्पतालों में मिलता है। यह पूरी तरह से सच नहीं है। यह फंगस अस्पतालों के साथ घर के एसी, कूलर और गंदगी वाली जगहों पर मौजूद है। यह फंगस सिर्फ कमजोर इम्‍यूनिटी वाले लोगों को अपना शिकार बना रहा है।

ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. संतोष शंकर रे ने बताया कि इससे डरने की जरूरत नहीं हैं। इस फंगस से सावधान रहने की आवश्‍यकता है। घर की साफ-सफाई पर विशेष ध्‍यान देने की जरूरत है। कोरोना की तरह ब्‍लैक फंगस एक दूसरे के स्पर्श से नहीं फैलता है। यह फंगस पहले से ही हमारे बीच हवा, मिट्टी, एसी, गंदगी वाली जगहों में मौजूद है। इस फंगस से उन लोगों को अलर्ट रहना चाहिए, जिनकी इम्‍युनिटी काफी कमजोर है।

*समय से पता लग जाए तो इलाज संभव*

डॉ. रे ने बताया कि ब्‍लैक फंगस के कण हवा में उड़ रहे हैं। जो हमारे नाक में चले जाते है। नाक में कुछ ऐसे सेल होते है। जो इसे नष्‍ट कर देते हैं। जिन लोगों की इम्‍यूनिटी कम होती है। उनके नाक के सेल इन्‍हें नष्‍ट नहीं कर पाते। जिसके बाद यह फंगस शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। ऐसे में उन लोगों को ज्‍यादा खतरा होता है। जो शुगर का मरीज है। यदि समय रहते इसका पता लग जाए तो एंटी फंगस दवाओं से इसका इलाज संभव है।
 

*बोले एक्सपर्ट;*
ब्‍लैक फंगस वातावरण में होता है। शरीर की इम्‍यूनिटी कमजोर होती है तो यह फंगस ज्‍यादा हॉवी होता है। ज्‍यादातर लोग घरों में ही कोरोना संक्रमण का इलाज करा रहे हैं। वह ऑक्‍सीजन का भी इस्‍तेमाल कर रहे। सही तरीके से पाइप की सफाई न होने की वजह से फंगस के सेल नाक में प्रवेश कर जाते हैं। जो कि मरीज के लिए घातक है। इसके इलाज में डॉक्‍टर के परामर्श की जरूरत होती है। डायबिटीज के मरीज दवा का सेवन बंद न करें। स्‍टेरायड डॉक्‍टर की सलाह पर बंद करें। समय से मरीज डॉक्‍टर के पास पहुंचे तो इस बीमारी से बचाया जा सकता है।

*डॉ. आदित्‍य पाठक, ईएनटी, बीआरडी मेडिकल कालेज*

प्रकृतिक चिकित्सा की मुख्य विशेषताएं

प्राकृतिक चिकित्सा की विशेषताएं
1-सभी रोग, उनके कारण और उपचार एक हैं।दर्दनाक और पर्यावरणीय स्थिति को छोड़ कर ,सभी रोगों का कारण एक हैं यानी शरीर में रुग्णता कारक पदार्थ का संचय होना।सभी रोगों का उपचार शरीर से रूग्णता कारक पदार्थ का उनमूलन हैं।
2-रोग का प्राथमिक कारण रुग्णता कारक पदार्थ का संचय हैं ।बैक्टीरिया व वायरस शरीर मे ंप्रवेश कर तबभी जीवित रहते हैं जब रुग्णता कारक पदार्थ का संचय हो और उनके विकास के लिए अनुकूल वातावरण शरीर में स्थापित हुआ हो ।अत:रोग का मूल कारक रुग्णता कारक पदार्थ हैं और बैक्टीरिया द्वितीयक कारण बनते है।
3-गंभीर बीमारियां शरीर द्वारा आत्म चिकित्सा का प्रयास होता हैं। अत:वे हमारे मित्र हैं, शत्रु नहीं । पुराने रोग गम्भीर बिमारियों के गलत उपचार और धमन  का परिणाम हैं।
4-प्रकृति सबसे बड़ा मरहम लगाने वाली हैं ।मानव शरीर में स्वयं ही रोगों से खुद को बचाने की शक्ति हैं तथा अस्वस्थ होने पर स्वास्थ्य पुनः प्राप्त कर लेती हैं ।
5-प्राकृतिक चिकित्सा में केवल रोग ही नहीं बल्कि रोगी के पूरे शरीर पर असर होकर वह नीवकृत होता हैं।
6-प्राकृतिक चिकित्सा द्वारा पुरानी बिमारियों से पीड़ित मरीज को भी अपेक्षाकृत कम समय में सफलता पूर्वक उपचारित किया जाता हैं।
7-प्रकृति के उपचार मे ं दबे हुए रोगों को सतह पर लाया जाता हैंऔर स्थायी रूप से हटा दिया जाता हैं ।
8-प्राकृतिक चिकित्सा एकही समय में सभी तरह के पहलुओं जैसे शारिरिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक का उपचार करती हैं ।
9-प्राकृतिक चिकित्सा शरीर का संपूर्ण रुप से उपचार करती हैं।
10-प्राकृतिक चिकित्सा के अनुसार ,केवल भोजन ही चिकित्सा हैं, कोई बाहरी दवाओं का इस्तेमाल नहीं किया जाता हैं।
11-स्वयं के आध्यात्मिक विश्वास के अनुसार प्रार्थना करना उपचार का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।

रविवार, 16 मई 2021

प्राकृतिक चिकित्सा से भागेगा कोरोना व ब्लैक फंग्स, मानव शरीर में वायरस से लड़ने के तत्व मौजूद

चिकित्सा के क्षेत्र में प्राकृतिक चिकित्सा में किसी भी खतरनाक वायरस का पूर्व से उपचार किया जाता हैं।असाध्य रोगों को शरीर से दूर भगाने के लिए सबसे पहले शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत किया जाता हैं।
    प्राकृतिक चिकित्सा से कोरोना व ब्लैक फंग्स या अन्य खतरनाक वायरस को आसानी से भगाया जा सकता हैं।मानव शरीर में किसी भी खतरनाक वायरल से लड़ने के के तमाम ततव मौजूद होते हैं ।खानपान कि गड़बड़ी से उन तत्वों का संरक्षण हो जाता हैं। जिससे उन्हें पनपने का मौका मिल जाता हैं।यह प्राकृतिक चिकित्सा के विशेषज्ञयों का मानना हैं। इनके अनुसार प्राकृतिक चिकित्सा में किसी भी खतरनाक  वायरस का पूर्व से उपचार किया जाता हैं।असाध्य रोगों को शरीर से दूर भगाने के लिए सबसे पहले शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत किया जाता हैं।

पशु पक्षियों के बाँडी से फैल रहे वायरस।                     ----------------------------------------------------
  प्राकृतिक चिकित्सकों का मानना हैं कि जंगल कटने की तीव्रता से जंगली जानवर अचानक शहरों में प्रकट होने लगते हैं । इस तरह पशु पक्षियों के माँस खाने से उनके शरीर में मौजूद वायरस मानव शरीर में फैलने लगे हैं। यह मनुष्य में बढतें माँसाहार के कारण हो रहा हैं।सबसे पहले बता दे कि  कोरोना व ब्लैक फंग्स नया वायरस नहीं हैं। ऐसे कई खतरनाक वायरस वातावरण में पहले से मौजूद हैं। अफ्रीका के रिसेस मंकी से एचआईवी फैला। वहाँ रिसेस मंकी का शिकार कर उसका माँस खाने लगे । उसके पंजें, नाखून,खाल का इस्तेमाल होने लगा। रिसेस मंकी के हाँस्ट बाडी (आश्रयदायी शरीर)में मौजूद वायरस  मनुष्य में फैला। आज नतिजा खतरनाक हैं ।कोरोना या ब्लैक फंग्स नाम भले नया हैं लेकिन ऐसा वायरस पूर्व से भारतीय वातावरण मे भी हैं। डाँ जेता कहते हैं कि नवगछिया के धरहरा गांव में चमगादड़ों की संख्या काफी हैं।एक प्रचीन विशाल पीपल का पेड़ हैं।वर्ष 1990-91 तक लोग चमगादड़ों का माँस खाया करते थे । नतीजा वहां मनुष्य का मृत्यु का  दर बढ गया था।चिकित्सकीय सलाह पर वहाँ चमगादड़ खाना छोड़ा तो स्थिति सामान्य हुई। वर्ड फ्लू, स्वाइन फ्लू, ड्राप्सी  भी पशु -पक्षियों ,चिकन आदि खाने से फैला ।माँसाहार मानव शरीर के प्रतिरोध क्षमता का क्षरण भी करता हैं।

ऐसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाएँ

  प्राकृतिक चिकित्सा में इम्यूनिटी बढाने  और खतरनाक रोगों को दूर भगाने के लिए फलाहार जरुरी हैं । फल ,अँकुरित चना,मूँग ,गेहूं, कच्ची सब्जियों के सलाद ,रेशेदार भोजन, काला गुड़ लेने होगे।

  शरीर में तेजाब का होना जरूरी 

    शरीर में तेजाब की मात्रा जरूरी हैं  जो प्रतिरोधक क्षमता बढाता हैं। कोरोना या ब्लैक फंग्स या अन्य वायरस को भगाने के लिए तेजाब तो पी नही सकते। ऐसे में तेजाब यानी अम्ल हम खाद्य पदार्थ के जरिए शरीर के अन्दर पहुचाएंगे।इसके लिए खट्टे व तिखे खाद्य पदार्थ आहार मे ं सामिल करेंगे। जैसे इमली,इमली की पत्ती, करी पत्ता, नीबूं, अनानास, संतरा, मौसमी, आंवला, खट्टे दही की कढ़ी, टमाटर, पालक, मूली का इस्तेमाल करें।पेट साफ रहेगा। इंफेक्शन नहीं फैलेगा।सबेरे रोज बिस्तर छोडऩे पर आधा चम्मच मीठा सोडा एक गिलास पानी में मिला कर सेवन करना चाहिए जो खून को खारा बनाता हैं ।

इसे अपनाने से नहीं फटकेगा वायरस
1-नमक पानी का गलगला।
2-नहाने के पूर्व शरीर पर नमक का लेप लगाए,पांच मिनट बाद स्नान करें।
3-गर्म पानी का भाप लेना।
4-गर्म पानी में पैर रखना।
5-गहरे गड्डे से निकली मिट्टी का लेप शरीर पर लगाना।
6-लकड़ी व गोयठे की राख का भी लेप लगाकर शरीर सुखने दे फिर स्नान करें।

इन खाद्य पदार्थो से बनाए दूरी
     कब्ज बननेवाले प्रोसेस्ड फूड, मैदा के बने आहार से दूरी बनानी होगी।■

14 फरवरी से खुलेंगे नर्सरी से ऊपर के शैक्षणिक संस्थानरेस्टोरेंट सिनेमा हॉल अपनी क्षमता के अनुसार होंगे संचालित

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